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  लेख-किरण मेहता

  वृद्धावस्था जीवन

शोध:

घर घर जाकर किए गए सर्वे के मुख्य बिंदु- बुजुर्गों की जरूरतों के आकलन के लिए छ: महीने के कोर्स के छात्रों द्वारा भारत के सभी चार क्षेत्रों उत्तर, उत्तर पूर्व, दक्षिण और पूर्व में एक सर्वे किया गया। इस सर्वे के आधार पर बुजुर्गों की समस्याओं को इन चार श्रेणियों में बांटा गया-

  •  
  • आर्थिक

  •  
  • स्वास्थ्य संबंधी

  •  
  • विकलांगता

  •  
  • सामाजिक

    दिल्ली मे सर्वे से पता चला कि वृद्धों के बीच सबसे अधिक मानसिक विकलांगता, हऔी संबंधी तथा आख की समस्याएं पायी जाती हैं। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार की विकलांगता भी उनकी समस्याओं का बढ़ाने वाला एक प्रमुख्कारण था। दिल्ली के बुजुर्गों के बीच अकेलापन, आय के श्रोत का अभाव तथा बेरोजगारी उनके लिए सबसे बड़ी सामाजिक आर्थिक समस्याएं थीं। कलकत्ता में किए गए सर्वे में पता चला कि वहां के बुजुर्गो के बीच सामंजस्य की कमी, आय के श्रोत की कमी, मौलिक आव6यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाना, शराबखोरीनशे की लत तथा लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां मुख्य समस्याएं थीं।

    इंफाल में महिलाओं के बीच सामाजिक समस्याएं तथा पुरूषों में विकलांगता व्यापक रूप से पायी गयीं। दिल्ली और हैदराबाद के विपरीत कोलकाता क्षेत्र में  शराबखोरीनशे की लत के बाद पुरूषों के बीच विकलांगता और बुजुर्गो द्वारा महिलाओं के प्रति दर्ुव्ययवहार प्रमुख समस्याएं थीं। दक्षिण भारत के बुजुर्गो के बीच अकेलापन, आय के साधन का नहीं होना, बेरोजगारी, जोड़ों में दर्द और हऔी की समस्याएं बुजुर्गों के बीच ज्यादपायी गयीं।

    क्षेत्रीय सर्वे-सार
    अकेलेपन की भावना हर क्षेत्र के बुजुर्गों के बीच पायी जाने वाली सामाजिक समस्या थी। लेकिन कोलकाता के वृद्धों के बीच सामंजस्य का अभाव तथा इंफाल में बुजुर्गो द्वारा दर्ुव्यवहार की समस्या अन्य स्थानों की तुलना में काफी अधिक पायी गयी। सभी चार क्षेत्रों में बेरोजगारी, मौलिक जरूरतों का पूरा न हो पाना और आमदनी का श्रोत नहीं होना जैसी समस्याएं समान रूप से व्याप्त थीं। दे6ा के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में बुजुर्गों में हऔी और आंख की समस्या काफी अधिक पायी गयीं

    दस्तावेजीकरण -
    राष्ट्रीय नीति बुजुर्गों को यह आ6वस्त करना चाहती है कि वह असुरक्षित, अपमानित तथा हासिए पर नहीं रहेंगे। इसके अंदर आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास, कल्याण, दर्ुव्यवहार तथा शोषण से बचाव तथा उत्पादक सशाक्तिकरण जैसी कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा की गयी है।

    वृध्दावस्था देखभाल-प्रयोक्ताओं के लिए सरल तथाउपयोगी पुस्तिका -
    यह किताब राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान द्वारा हिन्दी तथा अंग्रेजी में छापी गयी है। इसमें विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के उद्देश्य, पात्रता की शर्तें, प्राप्त होनेवाले लाभ और उन्हें प्राप्त करने के तरीके दिए गए हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म भी इस पुस्तिका में दिए गए हैं

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