पाठयक्रम
पिछले वित्तीय वषॅ मे राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के वृद्धावस्था संभाग ने निन्मलिखित पाठ्यक्रम तैयार किए
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वृद्धावस्था देखभाल से संबंधित 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स के लिए पाठयक्रम |
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समेंकित वृद्धावस्था देखभाल से संबंधित एक वॅषीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा के लिए पाठ्यक्रम। |
इन पाठयक्रमों के आधार पर प्रशिक्षण मॉडयूल विकसित किए जा रहे हैं और उनकी पूर्व-परीक्षा की जा रही है
गतिविधियां
बुजुर्गों की देखभाल की राष्ट्रीय पहल (नाइस) के तहत राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान आयोजित करता है:
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वृद्धावस्था देखभाल पर विशेषज्ञों की परार्मशदातृ मीटिंग |
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वृद्धावस्था देखभाल पर शीर्ष-प्रशिक्षणदाताओं का प्रशिक्षण |
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वृद्धावस्था देखभाल पर प्रशिक्षण तथा शैक्षणिक कोर्स |
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समुदाय के अंदर बुजुर्गों के लिए ऑरिएंटेशन कार्यक्रम |
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युवकों को संवेदनशील बनाने के लिए कायॅक्रम |
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स्कूल के शिक्षकोंछात्रों को संवेदनशील बनाने के लिए कार्यक्रम |
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संबधित विभागों जैसे पुलिस स्वास्थ्यसेवांए न्यायपालिका तथा निवाॅचित प्रतिनिधियों के प्रमुख कार्यकर्ताओं के लिए आँरिएंटेशन कायॅक्रम |
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समुदाय के अंदर बुजुर्गों की आवश्यकताओं के आकलन तथा उनकी पूर्ति के लिए लोगों के पास जाकर कार्यक्रमों का आयोज; |
प्रशिक्षण तथा क्षमता-निर्माण
तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स:
तीन महीने के इस सर्टिफिकेट कार्यक्रम के दौरान गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रशिक्षुओं को वृद्धावस्था देखभाल की विभिन्न तकनीकों तथा तरीकों से अवगत कराया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत अभी तक पूरे देश में गैर-सरकारी संस्थाओं के 250 से अधिक मुख्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। (उत्तर-पूर्व-इंफाल, पूर्व-कोलकाता, पश्चिम-पुणे, दक्षिण-हैदराबाद तथा उत्तर-दिल्ली
छ: महीने का सर्टिफिकेट कोर्स:
छ: महीने का यह सर्टिफिकेद कार्यक्रम नयी दिल्ली, कोलकाता, इंफाल और हैदराबाद स्थित क्षेत्रीय केंद्रों में चलाया जाता है। अब तक कुल 300 छात्रों ने यह परीक्षा पास की है। चौथा बैच मई 2004 में शुरू होना था। इकोर्स के लिए चयन अखिल भारतीय चयन परीक्षा तथा सामान्य अभिरूचि जांच (कैट) के आघार पर किया जाता है जिसके लिए आवेदन राष्ट्रीय क्षेत्रीय अखबारों में इ6तहार के माध्यम से आमंत्रित किए जाते हैं। इसके मुख्यत: चार मॉडयूल हैं-सामाजिक वृद्धावस्था विज्ञान, प्रारंभिक वृद्धावस्था शिक्षा, प्रायोगिक वृद्धावस्था शिक्षा तथा वृद्धावस्था देखभाल।
1 साल का स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्स:
स्नातकोत्तर पाठयक्रम में वृद्धावस्था विज्ञान, वृ.द्धावस्था स्वास्थ्य, वृद्धावस्था प्रबंधन, सामाजिक नीति तथा योजना, वृद्धावस्था सलाहसेवाएं तथा वृद्धावस्था शोध जैसे विषय शामिल हैं। इसके अंतर्गत सैद्धांतिक तथा व्यावहारिसत्र, प्शिक्षण अनुभव तथा प्रोजेक्ट कार्य भी शामिल हैं। इसके अलावा सेमिनार प्रस्तुति तथा लघु-शोधप्रबंध भी इस कोर्स के आवश्यक हिस्से हैं। हस कोर्स में 20 लोगों का दाखिला लिया जाता है। मेघावी छात्रों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है।
स्नातकोत्तर डिप्लोमा:
ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों मे बुजुर्गों की बढ़ती हुई आबादी को देखते हुए वर्तमान समय की संस्थाओं में सहयोगी सेवाएं नाकाफी हैं। वृद्धों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए हमें खुद को तैयार करना आव6यक है। प्रोजेक्ट नाइस के तहत वृद्धों की सेवा के क्षेत्र में दक्षता आधारित, कार्यक्षेत्र उन्मुख तथा प्रशिक्षित लोगों को उपलब्ध करवाने के लिए 'समेकित वृद्धावस्था देखभाल' में एक साल का स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है। यह कोर्स लोगों को एक चुनौती भरा कैरियर भी दे सकता है। इस कोर्स का उद्दे6य है वृद्धों की सेवा से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत एवं वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना ताकि बुजुर्गो के लिए काम करने के लिए आव6यक दक्षता एवं रूझान पैदा किया जा सके। इस पाठयक्रम मे वि6ोषज्ञता वाले छ: परचे हैं:
वृद्धावस्था विज्ञान, वृद्धावस्था स्वास्थ्य, वृद्धावस्था प्रबंधन, सामाजिक नीति तथा योजना, वृद्धावस्था परार्म6ासेवाएंतथवृद्धावस्थाशोध।
आवश्यक योग्यताएं:
द्वितीय श्रेणी से स्नातक। समाजशास्त्र, सामाजिक कार्य, नृतत्वशास्त्र, गृहविज्ञान तथा नर्सिंग विषयों में स्नातकों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिन आवेदनकर्ताओं को वय:सेवा में सर्टिफिकेट तथा इस प्रकार के कार्य में लगी संस्थाओं में काम करने का अनुभव है उन्हें और भी तरजीह दी जाएगी। इस कोर्स में दाखिला अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित सामान्य अभिरूचि जांच (कैट) के आधार पर की जाती है। दाखिले के लिए मेधा-सूची परीक्षा, समूह-वार्ता तथा साक्षात्कार के अंकों को मिलाकर तैयार किया जाता है।
कोर्स की अवधि-1 साल
कुल सीट-20
राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय अखबारों में कोर्स के बारे में घोषणा- मईजून
सामान्य अभिरूचि जांच परीक्षा का आयोजन- जुलाई अगस्त
कोर्स की शुरूआत- 1 अक्टूबर
कैरियर की संभावना:
स्नातकोत्तर कोर्स करने के बाद व्यक्ति राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्थाओं,, सरकारी क्षेत्र, कॉरपोरेट क्षेत्र तथा शैक्षणिक संस्थानों में निम्नलिखित प्रकार के कार्य कर सकता है:
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प्रोजेक्ट निदेशक कार्यक्रम निदेशक |
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मानव संसाधन विकास व्यवसायी |
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समुदाय केंद्रित संस्थाओं में परार्मशदाताकंसलटेंट |
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निवासी कल्याण संस्थाओं तथा गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोगी |
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अस्पतालों में कार्यरत व्यवसायी |
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सरकारी क्षेत्रों में मध्य स्तर के व्यवसायी कल्याण अधिकारी |
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कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यक्रम अधिकारी प्रबंधन अधिकारी शैक्षणिक संस्थाओं मे संभावित संकाय सदस्य तथा दिग्दशॅक / प्रशिक्षक |
गुरू प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण
राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के द्वारा संस्थान में चलाए जा रहे विभिन्न पाठयक्रमों के लिए गुरू प्रशिक्षकों का एक छोटा सा समूह तैयार किया गया है। निर्धारित योग्यता वाले लोगों का चयन कर उन्हें इस काम के लिदो सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाता है। ये गुरू प्र6ािक्षक उन सभी क्षेत्रों के लिए तैयार किए जाते हैं जहां इन पाठयक्रमों को चलाया जाता है जैसे कि उत्तर, दक्षिण पूर्व, मध्य, पूर्व, प6चिम तथा भारत के उत्तर-पूवीराज्य।
तीन महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम
ये कोर्स उन गैर-सरकारी संगठनों के मुख्य कार्यकर्ताओं के लिए तैयार किए गए हैं जो वय:सेवा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसे मंत्रालय की ओर से ग्रांद-इन-एड योजना के तहत आर्थिक सहयोग प्राप्त होता है। चूंकि ये कार्यकर्ता वृद्धों की सेवा में पहले से ही कार्यरत हैं इसलिए यह कोर्स उन्हें सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक जानकारी देकर उनकी दक्षता में वृद्धि करता है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम देश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किया जातहै। सन 2000-2002 के बीच संस्थान ने तीन महीने के दस प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उत्तर-पूर्व (इंफाल), पूर्व (कोलकाता), प6चिम (पुणे), दक्षिण (हैदराबाद) तथा उत्तर (दिल्ली) में आयोजन किया। कुल मिलाकर 250 गैर-सरकारसंगठनों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ अबतक मिल चुका है। इस पाठयक्रम के मूल्यांकन तथा पुनरीक्षण के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन भी दिल्ली, हैदराबाद और कोलकाता में किया जा चुका है जिसके आधपाठयक्रम को अद्यतन बनाया गया हयह कोर्स शैक्षणिक व्याख्यानों तथा व्यावहारिक कक्षाओं के आधार पर तैयार किया गया है। इस कोर्स के दौरान थोड़े समय के लिए इंटर्नशिप का भी प्रावधान है। इंटर्नशिप के दौरान छात्र साठ वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के बीच जाकर उनकी जरूरतों के आकलन और उनकी पूर्ति के लिए छ: महीने के लिए काम भी काम करते हैं।
सर्टिफिकेट कोर्स
इस कोर्स की परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य है वृद्धावस्था सेवकों की एक ऐसी पेशेवर अगली पंक्ति तथा दक्ष जनबल का निर्माण जो पारिवारिक एवं सामुदायिक परिवेश में बुजुर्गों की सेवा और उनके कल्याण के लिए तत्पर हों। युवावर्ग को वृद्धों की जरूरतों को पूरा करने के वास्ते तत्पर रहने के लिए प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इसलिए वृद्धों की सेवा के लिए नेतृत्वकारी लोगों का एक दस्ता तैयार करना इस कोर्स का उद्देश्य है। इसके लिए उन्हें बुजुर्गों की सामाजिक, मनोवैज्ञानिक तथा शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखकर आव6यक प्रशिक्षण दिया जाता है।
आव6यक योग्यताएं:
मैट्रिकुलेशन में कम से कम 45 प्रतिशत अंक। उम्र कम से कम 18 वर्ष। इस कोर्स में दाखिला हर साल जनवरीजुलाई में आयोजित एक अखिल भारतीय सामान्य अभिरूचि जांच (कैट) के आधार पर किया जाता है। कोर्स में दाखिला प्रवेश परीक्षा तथा साक्षात्कार के अंकों को मिलाकर तैयार मेधासूची के आधार पर होता है।
साल में कोर्स की संख्या-दो
कोर्स की अवधि- छ: महीने
कुल सीट: 30 प्रति कोर्स
राष्ट्रीय क्षेत्रीय दैनिकों में कोर्स की घोषणा- हर साल दिसंबर तथा जून
कोर्स की शुरूआत-अप्रीलतथाअक्टूबर
संभावित कैरियर
स्वास्थ्य कार्यकर्ता
नर्सिंग सहयोगी
घरेले नर्सिंग सहायक
घर पर देखभाल करने वाला पेशेवर कार्यकर्ता
सामाजिक कार्यकर्ता
आपातकालीन सहायता कार्यकर्ता
स्थायी रूप से घर पर सेवा करने वाला कार्यकर्ता
चलंत मेडिकल यान सहायक
गैर सरकारी संगठनों तथा शोध संस्थाओं के साथ प्रोजेक्ट सहायक |